मैं केसर एक बाग का,
मुझे हवा तुम्हारी दूर से अाई,
तुम जीभ को भाती रसमलाई,
मुझे भीतर अपने घोलने आई!
मै गाढा,गीला,बहता केसर,
तुम मर्ज़ सी बेजान पडी
बन के औसधी गिर गया बदन पर,
हौले से तेरी जान खिली!
तुम चाँद से हो जाओ जो रूसवा,
चाँदनी की चाहत मे,
मैं केसर बन आऊ डिबिया मे,
लत-पत सी एक आहट मे!
चहरे की अरदास बुझाने,
खफाओ की डोरी सुलझाने,
तेरे चंचल मन की राहत मे!
तुम खफा जो हो जाती जहान से सारे,
महफुज़ ना रहते जब खुशियो के तारे,
मैं धुली केसर बन हवा मे घुलता,
जाने को तेरी साँसो के भीतर,
के सुलाह करु बस खुशबू के सहारे!
मैं ख्वाबो के सिढियो तले,
मद्धम-मद्धम चढता जाऊ,
मैं बनु लाल सुगंधित केसर,
हर बार तुम्हे कुछ नया बनाऊ!
पर जोड दुँ हर कडी से तुमको
तिल हो तुम या बन जाओ शैल,
कि परखो जब तुम इकरार ये मेरा,
ना जहर मिले ना मिल पाए मैल!
#प्रियाँशु
मुझे हवा तुम्हारी दूर से अाई,
तुम जीभ को भाती रसमलाई,
मुझे भीतर अपने घोलने आई!
मै गाढा,गीला,बहता केसर,
तुम मर्ज़ सी बेजान पडी
बन के औसधी गिर गया बदन पर,
हौले से तेरी जान खिली!
तुम चाँद से हो जाओ जो रूसवा,
चाँदनी की चाहत मे,
मैं केसर बन आऊ डिबिया मे,
लत-पत सी एक आहट मे!
चहरे की अरदास बुझाने,
खफाओ की डोरी सुलझाने,
तेरे चंचल मन की राहत मे!
तुम खफा जो हो जाती जहान से सारे,
महफुज़ ना रहते जब खुशियो के तारे,
मैं धुली केसर बन हवा मे घुलता,
जाने को तेरी साँसो के भीतर,
के सुलाह करु बस खुशबू के सहारे!
मैं ख्वाबो के सिढियो तले,
मद्धम-मद्धम चढता जाऊ,
मैं बनु लाल सुगंधित केसर,
हर बार तुम्हे कुछ नया बनाऊ!
पर जोड दुँ हर कडी से तुमको
तिल हो तुम या बन जाओ शैल,
कि परखो जब तुम इकरार ये मेरा,
ना जहर मिले ना मिल पाए मैल!
#प्रियाँशु